शनिवार, 18 अक्टूबर 2008

मेरे पास ........

मेरे पास वह नहीं हैजो होना चाहिये था,
मैं मुस्कराया तब भीजब रोना चाहिये था।
मुझे सबने शक से देखा
मैं कीसको क्या बताता
मेरा दील ही मेरा दुश्मन
कैसे दोस्ती निभाता।
मुझे लगा मेरे बुजुर्ग नाराज हो गए
या गन्ने का रस पीने हाथरस रवाना हो गए
मुझे तो रोना आ रहा था
फिर भी मन को समझा रहा था
हरी हरण कर के लेगये दिन चैन
मैं तो दिल की लौ हरी चरणों में लगा रहा था
कोई हिकमत काम नहीं आई
हथोडे की चौट याद आई
खामोशी मेरी आदत नहीं है
बेअदबी मेरी फितरत नहीं है
आपकी हस्ती से मैं गाफिल नहीं हूँ
मैं आपका दोस्त होने काबिल नहीं हूँ
मुझे तो आपकी इंनायत चाहिए
आपके दिल की कायनात में एक कोना चाहिए ।

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